बाल गंगाधर तिलक

रत्नागिरी जो पुरवा , गंगाधर के बाल  ।

थी माताजी पार्वती , लाल बाल मिल पाल  ।।

लाल बाल मिल पाल , चले थे मिला के कदम  ।

खिले गरम दल माय , कई फेंके बम पे बम  ।।

कह 'वाणी' कविराज , फिर नसीब ऐसी फिरी  ।

आज़ाद हिंदुस्तान , नमन कोटि रत्नागिरी  ।।