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Ghusa H.I.V. Ka Ek Katra - घूसा एच.आई.वी. का एक कतरा #Aids_Pe_Nare @ Kavi Amrit 'Wani(AD10)


घूसा एच.आई.वी. का एक कतरा । कई मित्रों को होगा भारी खतरा ।।

भावार्थ किसी कारणवश यदि आपके शरीर में एच.आई.वी. का एक भी विषाणु प्रविष्ट हो गया तो धीर-धीरे वह लाखों-करोड़ों की संख्या में अपने हमशक्ल राक्षस तैयार करलेगा । यदि लम्बे समय तक किसी शारीरिक या मानसिक बीमारी आपको नहीं हुई तो किसी प्रकार के आपके मेडिकल टेस्ट भी नहीं होंगे । इस दौरान जिन-जिन से भी आपके यौन सम्बन्ध स्थापित हुए उनके एच.आई.ची. से संक्रमित होने की सम्भावना रहेगी । इस प्रकार एक एच.आई.वी. का रोगी जाने-अनजाने में अपने कई मित्रों के जीवन को खतरे में डाल सकता है । 'वाणी' कविराज कहना चाहते हैं कि बुद्धिजीवियों को चाहिए कि वेसमय-समय पर अपने शरीर की विभिन्न प्रकार की आवश्यक जाँचे चरवाते रहें ।

Ek Mitra Aids Rogi Ko Bhi Banao. मित्र एड्स रोगी को भी बनाओ #Aids_Pe_Nare @ Kavi Amrit 'Wani (AD09)


एक मित्र एड्स रोगी को भी बनाओ । हाथ मिला गले लगा अपने पास विठाओ ।।

भावार्थ
प्रत्येक व्यक्ति के कई मित्र होते हैं कुछ खासम-यास तो कुछ हाय हैलो तक ही सीमित होते हैं । यदि हमारी मित्र मण्डली में किसी को एड्स रोग हो जाता है तो आप उससे मिन्नता कदापि नहीं खोई । अपने मन में यह क्षम नहीं रख्ने कि यह रोग अब मुझे भी हो जाएगा । अपने रोग शास्त्त मित्रा से बराबर हाथ मिलाना. उसे गले लगाना, उसके साथ उठना-बैठना सभी कुछ पूर्ववत् जारी रखें । उसे यह आभास नहीं होने दे कि इस रोग के कारण मेरे साथियों ने मुझसे एक स्थाई दूरी कायम -करली । 'वाणी' कविराज कहते हैं कि आप यह पूर्ण विश्वास रखें कि यह रोग रोगी के द्वारा उसकी सेवा करने वालो को कदापि नहीं होता । ऐसे विकट समय में यदि आप मित्रता निभाएंगे तो आपके घनिष्ठ मित्र की आयु कुछ दिनों के लिए अवश्य बढ़ेगी, और उसे अकेलापन नहीं खटकेगा ।

Aids grasit maa ki laachaari-एड्स ग्रसित माँ की लाचारी #Aids_Pe_Nare @ Kavi Amrit 'Wani (AD08)


एड्स ग्रसित माँ की लाचारी । बच्चे को मिलती वही बीमारी ।।

भावार्थ प्रत्येक माता-पिता अपनी संतानों को बहुत कुछ विरासत में देकर जाते हैं यया खानदानी हूनर, जमीन-जायदाद धन-दौलत इत्यादि । एच.आई.वी.रोगाणुओं से ग्रसित गर्भवती माताओं की भी बड़ी विचित्र मजबूरिया होती हैं । प्रसव के दौरान जन्म लेने वाली सन्तान के रक्त में भी एच.आई.वी. के वहीं रोगाणु उपलब्ध होंगे जो उसकी माता के रक्त में थे । बच्चा माता के खून से ही परिपक्व होता है । एच.आई. ची. सक्रमित माँ का जन्मजात बच्चादी आयुभी नहीं हो पाता एवं जब तक जीवित रहता तब तकशारीरिक व मानसिक दृष्टि से कमजोर मी रहता है । 'वाणी' कविराज कहते है कि यदि किसी माता को यह पता लग जाए फि वह एच.आई.वी से ग्रसित है तो बहुत अच्छा यह है कि ऐसी माताएं गर्भधारण ही न करें ।

Mana Karne Ki Kala Sikhiye - मना करने की कला सीखिए #Aids_Pe_Nare @ Kavi Amrit 'Wani (AD07)


जीवन को कुछ आसान कीजिए । मना करने की कला सीखिए ।।

भावार्थ
जीवन संघर्षों की अनन्त अंशाला है । गुद्धिमान एवं पर्यशाली व्यक्ति इसमें विजयी होते हैं । कई लोग महज इस वजह से परेशान रहते हैं कि उन्हें कोई ऐसा कार्य करने के लिए कह देते हैं जिन्हें ना तो वे पूर्ण कर सकते हैं और नाचे मना कर सकते हैं । इन्हीं अन्तईन्द्रों के कारण वे हर वक्त चिंतित दिखाई देते हैं । वाणी' कविराज यह कहना चाहते हैं कि यदि आपने मना करने की कला सीख ली, हंसते-हंसते अपनी अनिच्छा को जाहीर करने का हूनर सीख लिया तो कई समस्याएं आप तक पंहुचने से पूर्व ही हल हो जाएगी । यह बात बौद्धिक कौशलता साहस और आत्मविश्वास पर निर्भर करती हैं । प्रसंग चाहे धन-दौलत का हो चाहे तन-मन के सौदे का हो अगर जो चीज आपके गले नहीं उतरती तो उसे तुरन्त थूक कर बाहर फेंकते हुए फीलगुड अनुभव करे

Sankramit khoon - संक्रमित खून #Aids_Pe_Nare @ Kavi Amrit 'Wani (AD06)


चढ़ गया एच.आई.वी.का संक्रमित खून । 10-15 सालों में होए खून का खून ।।

भावार्थ अज्ञानतावश,भूलवश या किसी अन्य कारणवश किसी गम्भीर रोगी को एच.आई.वी. संक्रमित रवत चढ़ जाता है या रक्त परीक्षण तो किया गया किन्तु वह "विन्डो पीरियड' के कारण एच आई वी. नेगेटिव निकला,या किसी भी अन्य परिस्थितियों के अन्तर्गत यदि रोगी को एच.आई.वी. का संपमित खून चढ़ा दिया तो एक बार तो वह ठीक होकर हॉस्पीटल के शैयया से उठ जाएगा किन्तु धीरे-धीरे उसके शरीर की रोग प्रतिरोधात्मक शक्ति भीण हो जावेगी । यदि समय-समय पर स्वत्त परीक्षण करवा कर आवश्यक सावधानियां नहीं बरती तो 10-15 वर्षों के भीतर ही हॉस्पीटल में चढ़ाया गया सून ही उसके जून का खून कर देगा । 4 लाख योनियों में सर्वश्रेष्ठ यह मानव शरीर व्यर्थ ही अकाल मृत्यु के मुंह में जाने के लिए विवश हो जाएगा । 'वाणी' कविराज कहते है कि किसी भी रोगी को रक्त चढ़ाते समय चढ़ने वाले रक्त का पूर्ण प्रयोगशाला परीक्षण होना चाहिए एवं जहां तक संभव हो रोगी के परिजनों के रक्त्त को ही प्राथमिकता देनी चाहिए ।




Hoga Aids Usi ka Sathi - होगा एड्स उसी का साथी #Aids_Pe_Nare @ Kavi Amrit 'Wani (AD05)



होगा एड्स उसी का साथी । जीते-जी भूले जो जीवन साथी ।।

भावार्थ
एड्स होने के प्रमुख कारणों में से एक यह भी है कि अपने जीवन साथी के अतिरिक्त किसी अन्य से यौन संबंध स्थापित करना । असुरक्षित यौन सम्पर्को से इस रोग द्वारा संक्रमित होने की सर्वाधिक संभावनाए होती है । 'वाणी' कविराज कहते हैं कि जन्मों-जन्मों का साय निभाने वाले जीवन साथी को परदेस में भी सदैव मानसिक रूप से साथ रखना चाहिए । एवं उनके प्रति अनुराग, सत्य, निष्ठा एवं वफादारी में किसी प्रकार की कमी नहीं आनी चाहिए । एच आई वी. से बचाने का यह भी एक अचूक उपाय है, कि आप अपने जीवन साथी के प्रति जीवन भर पूर्ण निष्ठावान बने रहें ।


Aids Ban Na Paye Mahamari - एड्स बन न पाए महामारी #Aids_Pe_Nare @ Kavi Amrit 'Wani (AD04)


आओ अटकलें लगाएं सारी । एड्स बन न पाए महामारी ।।

भावार्थ
आज एड्स विश्व में सर्वाधिक तेजी से बढ़ने वाला रोग है । प्रतिदिन सैकडो नहीं हजारों नए रोगी इसकी चपेट में आ रहे हैं । यदि हम सबने मिलकर इस ओर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया, आम जनता को सही एवम् आवश्यक जानकारियां नहीं दी और समझदार होकर भी समाज और राष्ट्र के प्रति लापरवाह बने रहे तो वह दिन दूर नहीं होगा जिस दिन एड्स महामारी का रूप धारण कर लेगा । तब हमारे द्वारा किए गए छोटे-मोटे सारे प्रयास ऊंट के मुंह में जीरे की भाति प्रभावहीन हो जाएंगे । 'वाणी' कविराज कहना चाहते हैं कि आओ, हम सच विचार गोष्ठी में चलें कार्यशालाएं आयोजित करें और सुरसा के मुंह की भांति बढ़ती हुई इस महामारी पर विजय पाने की सफल रणनीतियां बनाएं ।  




Aids Rog kisi ko hoy nahi - एड्स रोग किसी को होय नहीं #Aids_Pe_Nare @ Kavi Amrit 'Wani (AD03)


एड्स रोग किसी को होय नहीं । दुनियां में इसका उपचार नहीं ।।


भावार्थ
मानव शरीर में कई बार कई बीमारियां ऐसी होती हैं जो बिना किसी विशेष कारणों के आ जाती और दो-पांच दिनों में विना दवाओं के ही चली जाती है । एड्स एक ऐसा रोग है जो वैसे तो मौसमी बीमारियों की तरह रस्ते चलते हर किसी को होता नहीं, किन्तु यदि एक बार यह महारोग किसी को पकड़ लेता है तो फिर उसको प्राण लेकर ही छोड़ता, क्योंकि आज तक इस रोग का कोई टीका नहीं बन पाया और न ही इस पर पूर्णतया विजय पाने वाली औषधियां बन पाई हैं । 'वाणी' कविराज कहना चाहते हैं कि ईश्वर और प्रकृति तो आपकी मदद करेंगे ही किन्तु इससे पहले आप स्वयं अपने जीवन को ऐसी उच्च नैतिकता के साथ सुचारू ढंग से व्यतीत करने का सुदृढ मानस बनाएं कि आपके जीवन में ऐसे अचानक जान लेवा रोगों की सम्भावनाएं पूर्णतः समाप्त हो जाए ।



Samajho Aids Ki Hui Bimari - समझो एड्स की हुई बीमारी #Aids_Pe_Nare @ Kavi Amrit 'Wani (AD02)


मरती जाये जब सेना सारी । समझो एड्स की हुई बीमारी ।।
भावार्थ
एड्स के वायरस शरीर में प्रवेश पाने के पश्चात् 10-12 सप्ताह तक तो पूर्णतः निष्प्रभावी रहते हैं, किन्तु इस समयावधि के पश्चात् उक्त्त वायरस सक्रमित शरीर के सूल में स्थित श्वेत रक्त कणिकाओं को नष्ट करना प्रारम्भ कर देते हैं । श्वेत रक्त कणिकाएं हर मानव शरीर में 24 घण्टे तैयार एक विशाल सेना की भांति हर मोर्चे पर तैनात रहती है, जिसे एड्स के वायरस धीर-धीरे नष्ट करना प्रारम्भ कर देते हैं । प्रयोगशाला द्वारा स्वत इत्यादि के परीक्षणोपरान्त यदि यह पाया जाता है कि प्रतिदिन रक्त में श्वेत कणिकाओं की मात्रा कम होती जा रही तो शीघ्र ही यह दिन दूर नही जिस दिन इनकी संज्या शून्य के समकक्ष हो जाएगी । उस स्थिति में ऐसे रोगी को एड्स शासित रोगी कहा जायेगा । वह रोगी लाइलाज है ।



Sare Baiktriya Tab Nikale - सारे बैक्ट्रिया तब निकले #Aids_Pe_Slogans @ Kavi Amrit 'Wani (AD01)

सारे बैक्ट्रिया तब निकले ।

बीस मिनट तक सूई उबले ।।

भावार्थ अधिकांश बीमारियां विभिन्न प्रकार के बैक्ट्रिया के द्वारा फैलती है । शरीर में किसी भी प्रकार से बेविट्या के प्रवेश कर लेने के बाद वे धीरे-धीरे लाखों की तादाद में स्वजाति रोगाणुओं की संख्या बढ़ा लेते हैं । यदि शरीर की रोग प्रतिरोधात्मक क्षमता कमजोर है तो उस बैक्ट्रिया का प्रभाव ज्यादा एवं शीघ्र होगा । प्रथम प्रयास हमें यह करना चाहिए कि ऐसे विषाणु हमारे शरीर में प्रवेश ही नहीं कर पाएं । इंजेक्शन की सूई के द्वारा भी ये शरीर में प्रवेश कर सकते हैं । सूई को 20 मिनट तक उबलते पानी में रखते हुए रोगाणुओं को पूर्णतः नष्ट किया जा सकता है । नई डिस्पोजल सीरिज के वनिस्पत 20 मिनट तक उबली हुई |