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भारत छोड़ो आंदोलन दिवस




भारत छोड़ो आंदोलन दिवस

 सब अंग्रेजों छोड़ना , भारत को तत्काल  ।

मुम्बई अधिवेशन में , गांधी वाक्य कराल  ।।

गांधी वाक्य कराल , जय घोष ''करो या मरो'  ।

कह जन-मन भूचाल , अब गोरों से मत डरो  ।।

कह 'वाणी' कविराज , होगा रोज नया गज़ब  ।

भागो अपने देश , अंग्रेजों छोड़ कर सब  ।।


हिरोशिमा डे


हिरोशिमा डे
 अमेरिका की द्वेषता ,  विश्व युद्ध के माय  ।

बम गिरा कर हिरोशिमा , लाखों जीव जलाय  ।।

लाखों जीव जलाय , आज भी उठती लपटें  ।

कीनो सभी विचार , भावी प्रलय से निपटें  ।।

कह 'वाणी' कविराज  ,सर्वसम्मति सहित लिखा  ।

बन सकेगा ना कोय , फिर से कभी अमेरिका  ।।


(अंतर्राष्ट्रीय ट्राफिक लाईट दिवस)


(अंतर्राष्ट्रीय ट्राफिक लाईट दिवस)

 रंग-बिरंगी लाइटें , चौराहों के पास  ।

पहले देखो ध्यान से , दिखता कौन प्रकाश  ।।

दिखता कौन प्रकाश , लाल कहे ठहर जाओ  ।

पीला हो तैयार , हरा देख गति बढ़ाओ  ।।

'वाणी' सबको मान ,  ढंग से चल बेढ़ंगी  ।

पुलिस  रोकती देख , लाइटें रंग-बिरंगी  ।।


राष्ट्रीय रंग पुस्तक दिवस.....


 रंग बिरंगे रंग से, रंग लो तुम किताब ।

सुंदर सुंदर रूप हो, राजा और नवाब ।।

राजा और नवाब, हर चित्र रचो रंगीन ।

हो जाय लोट-पोट, जहां चेहरे गमगीन ।।

कह 'वाणी' कविराज, रंग लो कटी पतंग ।

बच्चे दौड़े आय, देखने उभरते रंग ।।

विश्व स्तनपान दिवस.......


विश्व स्तनपान दिवस 

प्यारे-प्यारे लाल का, पल-पल रखना ध्यान  ।

हो जाए छः माह का, नियमित मां स्तनपान  ।।

नियमित मां स्तनपान, जब लगे सब कुछ खाने  ।

दे पौष्टिक आहार, बैठना दूध पिलाने  ।।

कह 'वाणी' कविराज, हो जाय वारे-न्यारे  ।

लड़ने सरहद जाय, रक्षा करेंगे प्यारे  ।।


मोहम्मद रफ़ी..................


 उपमा तानसेन मिली,  गायक थे मशहूर  ।

संग लता के गीत जो,  सुनते हैं सब दूर  ।।

सुनते हैं सब दूर,  शहंशाह-ए-तरन्नुम  ।

रफ़ी पद्म श्री पाय,  साथ उनके गाओ तुम  ।।

कह 'वाणी' कविराज,  गाएंगे वही नगमा  ।

रहे सभी को याद,  जिसे तानसेन उपमा  ।।

राष्ट्रीय अभिभावक दिवस......


 अभिभावक हर हाल  में, पूछे अपने हाल  ।

पढ़ाई कैसी चलती, सच कहना गोपाल  ।।

सच कहना गोपाल, चिंताओं की भरमार  ।

सबल बुद्धि सब मार, बनना है श्रवण कुमार  ।।

कह 'वाणी' कविराज, यही सोचे हर पालक  ।

ऐसे कर उपकार, गर्वित होएं अभिभावक  ।।


नाग पंचमी.......


 नाग पंचमी

नाग पंचमी आज है,  नमन सभी अहिराज  ।

काल-सर्प का दोष हो,  पूरी पूजा आज  ।।

पूरी पूजा आज,  मिलता सबको आशीष  ।

दूध पिलाते  रहो,  दूर झुकाकर शीश  ।।

कह 'वाणी' कविराज,  मुसीबतें जाएं भाग  ।

होते अटके काम, लेय दूध काले नाग  ।।

विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस ........


 हरे-भरे वन हैं अगर, फल पाएंगे रोज  ।

तन-मन हैं जब संतुलित,  रोज मनेगी मोज  ।।

रोज मनेगी मोज, रहेंगे मिलजुल भाई  ।

खाना खाना साथ, आय ना कभी दवाई  ।।

कह 'वाणी' कविराज,  गांव-शहर खुशियां भरे  ।

बड़े करे परिवार, पौधे अगर हरे-भरे ।।


एपीजे कलाम.........

एपीजे कलाम

कलाम

राष्ट्रपति जो ग्यारहवे, थे लाड़ले कलाम  ।

मिला मिसालइल मैन को, भारत रत्न इनाम  ।।

भारत रत्न इनाम, अभियंता पद्म भूषण  ।

बना प्रक्षेपण यान, कर इसरो का अनुशरण  ।।

कह 'वाणी' कविराज, बेगम जुलेखा के पति  ।

पढ़े आप मद्रास, वीणा-वादक राष्ट्रपति  ।।

 

पाई-पाई का रखो , प्यारे सभी हिसाब  ।

हंसता मुखड़ा कांच में , खुल्ली देख किताब  ।।

खुल्ली देख किताब ,  पढ़ आय कर अधिकारी  ।

नाही इंकम खास , पर रिटन की तैयारी  ।।

कह 'वाणी' कविराज , समझ ले मेरे भाई  ।

है राष्ट्र का विकास , लिखादो पाई-पाई  ।।

श्रीकांत जचकर......

 

बसे पढ़े लिखे अधिक, हैं जचकर श्रीकांत  ।

हुई ना कभी आपकी , जिज्ञासाएं शांत  ।।

जिज्ञासाएं शांत , डाॅक्टर,वकील, प्रवक्ता  ।

थे आई. ए. एस. , विश्व विख्यात सशक्ता  ।।

कह 'वाणी' कविराज,  लिंबा बुक नाम तबसे  ।

लेय डिग्रियां बीस , विश्व में ज्ञानी सबसे  ।।

चंदा मामा जानते, मेरा दूर मुकाम । पहुंचेंगे मुझ तक

चंदा मामा जानते, मेरा दूर मुकाम ।

पहुंचेंगे मुझ तक वही, कोशिश हो अविराम ।।

कोशिश हो अविराम, आया अपोलो ग्यारह ।

तब नीलआर्मस्ट्रांग, एल्ड्रीन चले चंद्र सतह ।।

कह 'वाणी' कविराज, हर देश का हो झंडा ।

करते सब से आस, राह तके रोज चंदा ।।

 

महारथी ऐसे बनें, खेल खिलाड़ी चेस। खेलो प्यारे खेल को, पिटे

महारथी ऐसे बनें, खेल खिलाड़ी चेस ।

खेलो प्यारे खेल को, पिटे न प्यादा रेस ।।

पिटे न प्यादा रेस, जेल में राजा जाए ।।

 हाथी,घोड़ा, ऊंट, वज़ीरी भी भरमाए ।

कह 'वाणी' कविराज, चल के चाल चतुर तने  ।

पल में राजा मार, महारथी ऐसे बने  ।।

 

(कुमाऊं क्षेत्र का प्रसिद्ध त्यौहार) हरेला


 हरेला है कुमाऊँ में, श्रावण का त्यौहार ।

नई फसल संकेत दे, माने हर परिवार ।।

माने हर परिवार, रख भांत-भांत के बीज ।

पिलाय मन से नीर, बीज न होए खारिज ।

कह 'वाणी' कविराज, लगे खुशियों का मेला ।

शिव-गौरी आशीष, भू हरी करे हरेला ।।

चंद्रयान 3 .........

 

विक्रम अपने देश का, चंद्रयान था तीन ।

ऐसी भरी उड़ान जो, अमर हुआ वह सीन ।।

अमर हुआ वह सीन, चांद पर ढूंढ़ा पानी ।

प्रज्ञान का संज्ञान, लेते रहे विज्ञानी ।।

कह 'वाणी' कविराज, बाग-बाग हुए हमदम ।

थे एस सोमनाथ, साराभाई व विक्रम ।।

चार दिनों की जिन्दगी

चार दिनों की जिन्दगी
यूं
गुजर गई भाई |
दो दिन
हम सो ना सके
दो दिन
नींद नहीं आई

कवि अमृत"वाणी"

चार दिनों की जिन्दगी

चार दिनों की जिन्दगी
यूं
गुजर गई भाई |
दो दिन
हम सो ना सके
दो दिन
नींद नहीं आई

कवि अमृत"वाणी"