मुम्बई अधिवेशन में , गांधी वाक्य कराल ।।
गांधी वाक्य कराल , जय घोष ''करो या मरो' ।
कह जन-मन भूचाल , अब गोरों से मत डरो ।।
कह 'वाणी' कविराज , होगा रोज नया गज़ब ।
भागो अपने देश , अंग्रेजों छोड़ कर सब ।।
मुम्बई अधिवेशन में , गांधी वाक्य कराल ।।
गांधी वाक्य कराल , जय घोष ''करो या मरो' ।
कह जन-मन भूचाल , अब गोरों से मत डरो ।।
कह 'वाणी' कविराज , होगा रोज नया गज़ब ।
भागो अपने देश , अंग्रेजों छोड़ कर सब ।।
अमेरिका की द्वेषता , विश्व युद्ध के माय ।बम गिरा कर हिरोशिमा , लाखों जीव जलाय ।।
लाखों जीव जलाय , आज भी उठती लपटें ।
कीनो सभी विचार , भावी प्रलय से निपटें ।।
कह 'वाणी' कविराज ,सर्वसम्मति सहित लिखा ।
बन सकेगा ना कोय , फिर से कभी अमेरिका ।।
पहले देखो ध्यान से , दिखता कौन प्रकाश ।।
दिखता कौन प्रकाश , लाल कहे ठहर जाओ ।
पीला हो तैयार , हरा देख गति बढ़ाओ ।।
'वाणी' सबको मान , ढंग से चल बेढ़ंगी ।
पुलिस रोकती देख , लाइटें रंग-बिरंगी ।।
विश्व स्तनपान दिवस
प्यारे-प्यारे लाल का, पल-पल रखना ध्यान ।हो जाए छः माह का, नियमित मां स्तनपान ।।
नियमित मां स्तनपान, जब लगे सब कुछ खाने ।
दे पौष्टिक आहार, बैठना दूध पिलाने ।।
कह 'वाणी' कविराज, हो जाय वारे-न्यारे ।
लड़ने सरहद जाय, रक्षा करेंगे प्यारे ।।
उपमा तानसेन मिली, गायक थे मशहूर ।संग लता के गीत जो, सुनते हैं सब दूर ।।
सुनते हैं सब दूर, शहंशाह-ए-तरन्नुम ।
रफ़ी पद्म श्री पाय, साथ उनके गाओ तुम ।।
कह 'वाणी' कविराज, गाएंगे वही नगमा ।
रहे सभी को याद, जिसे तानसेन उपमा ।।
अभिभावक हर हाल में, पूछे अपने हाल ।
पढ़ाई कैसी चलती, सच कहना गोपाल ।।
सच कहना गोपाल, चिंताओं की भरमार ।
सबल बुद्धि सब मार, बनना है श्रवण कुमार ।।
कह 'वाणी' कविराज, यही सोचे हर पालक ।
ऐसे कर उपकार, गर्वित होएं अभिभावक ।।
नाग पंचमी
नाग पंचमी आज है, नमन सभी
अहिराज ।
काल-सर्प का दोष हो, पूरी पूजा आज ।।
पूरी पूजा आज, मिलता सबको आशीष ।
दूध पिलाते रहो, दूर झुकाकर
शीश ।।
कह 'वाणी' कविराज, मुसीबतें
जाएं भाग ।
होते अटके काम, लेय दूध काले नाग ।।
हरे-भरे वन हैं अगर, फल पाएंगे रोज ।
तन-मन हैं जब संतुलित, रोज मनेगी मोज ।।
रोज मनेगी मोज, रहेंगे मिलजुल भाई ।
खाना खाना साथ, आय ना कभी दवाई ।।
कह 'वाणी' कविराज, गांव-शहर खुशियां भरे ।
बड़े करे परिवार, पौधे अगर हरे-भरे ।।
एपीजे कलाम
कलाम
राष्ट्रपति जो ग्यारहवे, थे लाड़ले कलाम ।
मिला मिसालइल मैन को, भारत रत्न इनाम ।।
भारत रत्न इनाम, अभियंता पद्म भूषण ।
बना प्रक्षेपण यान, कर इसरो का अनुशरण ।।
कह 'वाणी' कविराज, बेगम जुलेखा के पति
।
पढ़े आप मद्रास, वीणा-वादक राष्ट्रपति ।।
बसे पढ़े लिखे अधिक, हैं जचकर श्रीकांत ।
हुई ना कभी आपकी , जिज्ञासाएं शांत ।।
जिज्ञासाएं शांत , डाॅक्टर,वकील, प्रवक्ता ।
थे आई. ए. एस. , विश्व विख्यात सशक्ता ।।
कह 'वाणी' कविराज, लिंबा बुक नाम तबसे ।
लेय डिग्रियां बीस , विश्व में ज्ञानी सबसे ।।
चंदा मामा जानते, मेरा दूर मुकाम ।
पहुंचेंगे मुझ तक वही, कोशिश हो अविराम ।।
कोशिश हो अविराम, आया अपोलो ग्यारह ।
तब नीलआर्मस्ट्रांग, एल्ड्रीन चले चंद्र सतह ।।
कह 'वाणी' कविराज, हर देश का हो झंडा ।
करते सब से आस, राह तके रोज चंदा ।।
महारथी ऐसे बनें, खेल खिलाड़ी चेस ।
खेलो प्यारे खेल को, पिटे न प्यादा रेस ।।
पिटे न प्यादा रेस, जेल में राजा जाए ।।
हाथी,घोड़ा, ऊंट, वज़ीरी भी भरमाए ।
कह 'वाणी' कविराज, चल के चाल चतुर तने ।
पल में राजा मार, महारथी ऐसे बने ।।
हरेला है कुमाऊँ में, श्रावण का त्यौहार ।नई फसल संकेत दे, माने हर परिवार ।।
माने हर परिवार, रख भांत-भांत के बीज ।
पिलाय मन से नीर, बीज न होए खारिज ।
कह 'वाणी' कविराज, लगे खुशियों का मेला ।
शिव-गौरी आशीष, भू हरी करे हरेला ।।
विक्रम अपने देश का, चंद्रयान था तीन ।
ऐसी भरी उड़ान जो, अमर हुआ वह सीन ।।
अमर हुआ वह सीन, चांद पर ढूंढ़ा पानी ।
प्रज्ञान का संज्ञान, लेते रहे विज्ञानी ।।
कह 'वाणी' कविराज, बाग-बाग हुए हमदम ।
थे एस सोमनाथ, साराभाई व विक्रम ।।