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विश्व शेर दिवस


 विश्व शेर दिवस 

 जंगल के राजा रहे  , सदियों से जो शेर  ।

चिड़ियाघर के पिंजरे , होते रैन-बसेर  ।।

होते रैन-बसेर , ताकते नव काॅलोनी  ।

फैक्ट्री धुंआ देख , हॅंसे योजना सलोनी  ।।

कह 'वाणी' कविराज , कटे पेड़ मन-मन कहे  ।

उजड़ रहे परिवार  , न जंगल के राजा रहे  ।।


रक्षाबंधन बहन


 रक्षाबंधन  बहन

बहन का सब ध्यान रखे , भाई वही कहाय  ।

मिले-जुले सब प्रेम से , बातें बहुत बताय  ।।

बातें बहुत बताय , सुनावे नई-पुरानी  ।

किसकी सासु तेज , किसकी भाभी सयानी  ।।

कह 'वाणी' कविराज , कुछ कहे कुछ करे सहन  ।

रखले सबसे प्रेम , यही समझदारी बहन  ।।

भारत छोड़ो आंदोलन दिवस




भारत छोड़ो आंदोलन दिवस

 सब अंग्रेजों छोड़ना , भारत को तत्काल  ।

मुम्बई अधिवेशन में , गांधी वाक्य कराल  ।।

गांधी वाक्य कराल , जय घोष ''करो या मरो'  ।

कह जन-मन भूचाल , अब गोरों से मत डरो  ।।

कह 'वाणी' कविराज , होगा रोज नया गज़ब  ।

भागो अपने देश , अंग्रेजों छोड़ कर सब  ।।


रवींद्र नाथ टैगोर ...


रवींद्र नाथ टैगोर 

 कविवर श्री टैगोर को , मिला प्रथम नोबेल  ।

 राष्ट्र-गान दो-दो रचे, हैं बारह नाॅवेल  ।।

हैं बारह नॉवेल  , गुनगुनाते गीतांजलि  ।

मात शारदा लाल , कोटि-कोटि श्रद्धांजलि  ।।

'वाणी' भारत रत्न , पुलकित सारे मित्रवर  ।

कविता,नाटक, गीत , पेंटिंग रवींद्र कविवर  ।।


राष्ट्रीय हथकरघा दिवस


 राष्ट्रीय हथकरघा दिवस 

कपड़े सब के खास  है , साहब हो या मेम  ।

भांत-भांत  की क्वालिटी , पैसों का सब गेम  ।।

पैसों का सब गेम , अच्छा सिस्टम पुराना  ।

बहुत मिले आराम , सीखे चर्खा चलाना  ।।

कह 'वाणी' कविराज  फेंसिंग ड्रेसें लफड़े  ।

लड़े  कचहरी माय , पहन फेशन के कपड़े  ।।


हिरोशिमा डे


हिरोशिमा डे
 अमेरिका की द्वेषता ,  विश्व युद्ध के माय  ।

बम गिरा कर हिरोशिमा , लाखों जीव जलाय  ।।

लाखों जीव जलाय , आज भी उठती लपटें  ।

कीनो सभी विचार , भावी प्रलय से निपटें  ।।

कह 'वाणी' कविराज  ,सर्वसम्मति सहित लिखा  ।

बन सकेगा ना कोय , फिर से कभी अमेरिका  ।।


पिंगली वेंकैयाजी (राष्ट्र-ध्वज निर्माता )....

पिंगली वेंकैयाजी  

(राष्ट्र-ध्वज निर्माता )

वेंकैयाजी पिंगली , झंडा दिया बनाय  ।

नंबर इसका पांचवा , अशोक-चक्र लगाय  ।।

अशोक-चक्र लगाय , केसरिया ओज प्रतीक  ।

सफेद सिखाय शांति , हरा है प्रगति की लीक  ।।

'वाणी' अशोक-चक्र , याद रखना भैयाजी  ।

झंडे की मुस्कान , सलामत वेंकैयाजी  ।।


 

कथा-सम्राट.........


 धनपतराय श्रीवास्तव हुए कथा-सम्राट  

गोदानगबन,निर्मला  कफ़न,पूस की रात  ।।

कफ़न,पूस  की रात परीक्षा,बूढ़ी काकी ।

अन्तर्द्वंद्व नर-नार रखा ना कुछ भी बाकी ।।

'वाणीप्रेम चंद पहचान ऐसी बनाय  

हिंदी देश-विदेश पहुंचाई धनपतराय  ।।

मैथिलीशरण गुप्त जयंती....

मैथिलीशरण गुप्त जयंती

 साकेत रची गुप्तजी, यशोधरा , झंकार ।

गुरुकुल, भारत भारती, पहले रचनाकार ।।

पहले रचनाकार, मुखरित की खड़ी बोली ।

अब हिंदी श्रंगार, सजा रही वृहद टोली ।।

कह 'वाणी' कविराज, जग व्यापकता संकेत ।

लिखते लाखों हाथ, प्रेरणा-पुंज साकेत ।।

विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस ........


 हरे-भरे वन हैं अगर, फल पाएंगे रोज  ।

तन-मन हैं जब संतुलित,  रोज मनेगी मोज  ।।

रोज मनेगी मोज, रहेंगे मिलजुल भाई  ।

खाना खाना साथ, आय ना कभी दवाई  ।।

कह 'वाणी' कविराज,  गांव-शहर खुशियां भरे  ।

बड़े करे परिवार, पौधे अगर हरे-भरे ।।


अंतर्राष्ट्रीय न्यायिक स्वयं कल्याण दिवस


 पद जो न्यायाधीश का , है इसलिए महान  ।

एक-एक की बात को , सुने लगा कर  ध्यान  ।।

सुने लगा कर ध्यान , वे खुद को वहां रखकर  ।

सोच गहन गंभीर , करे हर राज उजागर  ।।

कह 'वाणी' कविराज , तय करे अपराधी कद  ।

कितना मन बेचैन , कहे सज़ा-ए-मौत पद  ।।

 

पाई-पाई का रखो , प्यारे सभी हिसाब 

हंसता मुखड़ा कांच में , खुल्ली देख किताब  ।।

खुल्ली देख किताब ,  पढ़ आय कर अधिकारी 

नाही इंकम खास , पर रिटन की तैयारी  ।।

कह 'वाणी' कविराज , समझ ले मेरे भाई 

है राष्ट्र का विकास , लिखादो पाई-पाई  ।।

रामचरित मानस अंतस निर्मल राखिए, दान-पुण्य कर पाठ ।


 

रामचरित मानस

अंतस निर्मल राखिए, दान-पुण्य कर पाठ ।

अच्छे-अच्छे सोच की, बांधे मन में गांठ ।।

बांधे मन में गांठ, बढ़ाना ज्ञान उजाला ।

ऐसा बढ़े प्रकाश, रहे ना तिल भर काला ।।

कह 'वाणी' कविराज,  सुमन रामचरित मानस ।

लगे राम परिवार, सजाएं ऐसा अंतस ।।

चंदा मामा जानते, मेरा दूर मुकाम । पहुंचेंगे मुझ तक

चंदा मामा जानते, मेरा दूर मुकाम ।

पहुंचेंगे मुझ तक वही, कोशिश हो अविराम ।।

कोशिश हो अविराम, आया अपोलो ग्यारह ।

तब नीलआर्मस्ट्रांग, एल्ड्रीन चले चंद्र सतह ।।

कह 'वाणी' कविराज, हर देश का हो झंडा ।

करते सब से आस, राह तके रोज चंदा ।।

 

महारथी ऐसे बनें, खेल खिलाड़ी चेस। खेलो प्यारे खेल को, पिटे

महारथी ऐसे बनें, खेल खिलाड़ी चेस ।

खेलो प्यारे खेल को, पिटे न प्यादा रेस ।।

पिटे न प्यादा रेस, जेल में राजा जाए ।।

 हाथी,घोड़ा, ऊंट, वज़ीरी भी भरमाए ।

कह 'वाणी' कविराज, चल के चाल चतुर तने  ।

पल में राजा मार, महारथी ऐसे बने  ।।

 

विश्व इमोजी दिवस .........


संकेत कहे बात को, कैसा दिल का हाल  ।

आठ प्रहर अठखेलियाँ, उठते रहे बवाल  ।।

 उठते रहे बवाल, कैसे जानेंगे यार 

समय  नहीं है पास, भेज इमोजी दो चार  ।।

कह 'वाणी' कविराज, पल-पल सब रहो सचेत 

अनुभव साझा होय, शीघ्र इमोजी संकेत  ।।

आधा प्रतिशत नीर

आधा प्रतिशत नीर ही,  बुझा रहा जग  प्यास  ।

तीन टका पानी यहाँ,  पूर्ण करे सब आस  ।।

पूर्ण करे सब आस, बात-बात बातें अड़ी  ।

तर्क करे विद्वान, खूब उछालते पगड़ी  ।।

कह 'वाणी' कविराज, हल होयगी  यूँ  बाधा  ।

ढ़ाई प्रतिशत ध्रुव, फिर प्यास बुझाय आधा  ।।

 

(कुमाऊं क्षेत्र का प्रसिद्ध त्यौहार) हरेला


 हरेला है कुमाऊँ में, श्रावण का त्यौहार ।

नई फसल संकेत दे, माने हर परिवार ।।

माने हर परिवार, रख भांत-भांत के बीज ।

पिलाय मन से नीर, बीज न होए खारिज ।

कह 'वाणी' कविराज, लगे खुशियों का मेला ।

शिव-गौरी आशीष, भू हरी करे हरेला ।।

राष्ट्रीय प्लास्टिक सर्जरी दिवस

चेहरा देख-देख के, मत होना हैरान ।

करनी कितने जन्म की, सब जाने भगवान ।।

सब जाने भगवान,  दिया सब सोच समझ कर ।

सूरत सुंदर होय, गुण क्या रहते  वहीं पर ।।

कह 'वाणी' कविराज, चुको न मौका सुनहरा ।

 प्लास्टिक सर्जरी होय, चमक उठेगा चेहरा ।।

 

चंद्रयान 3 .........

 

विक्रम अपने देश का, चंद्रयान था तीन ।

ऐसी भरी उड़ान जो, अमर हुआ वह सीन ।।

अमर हुआ वह सीन, चांद पर ढूंढ़ा पानी ।

प्रज्ञान का संज्ञान, लेते रहे विज्ञानी ।।

कह 'वाणी' कविराज, बाग-बाग हुए हमदम ।

थे एस सोमनाथ, साराभाई व विक्रम ।।