https://youtube.com/shorts/s6uDEcUgfr0 यह कविता बॉलीवुड के महान अभिनेता धर्मेंद्र जी के संघर्ष, अभिनय और सुपरहिट फिल्मों को समर्पित है। कविता में धर्मेंद्र जी के परिवार, उनकी कला और उनकी कालजयी फिल्मों का अद्भुत वर्णन है। पिता किशन धर्मेंद्र के, मात सतवंत कौर । बनाइ फ़िल्में तीन सौ, सभी सुनहरी भौर ।। शोले, घायल, हुकूमत— चरण, दोस्त, बेताब— जुगनू, गुलामी, इज्जत— 'वाणी' आंखें, जुर्म, काजल, ममता, दिल्लगी । सनी, देवर, शिकार, फरिश्ते, सीमा, वर्दी ।। अगर आपको कविता पसंद आए तो LIKE, SHARE और SUBSCRIBE ज़रूर करें 🙏 #Dharmendra #Poetry #BollywoodKavita Dharmendra poem Dharmendra kavita Dharmendra movies Bollywood poetry Hindi kavita Dharmendra superhit films Filmy kavita Kavita on actor Hindi poem on Dharmendra Bollywood hero Dharmendra Actor Dharmendra poetry Emotional hindi poetry Filmi kavita Kavita Hindi Bollywood legend Dharmendra #Dharmendra #DharmendraPoetry #BollywoodKavita #HindiPoetry #FilmiKavita #BollywoodLegend #Kavita #PoetryHindi #DharmendraFans
🎬 फिल्मी कलाकार धर्मेंद्र – एक प्रेरक कविता || 24 नवंबर 2025 || कवि अमृत 'वाणी'
https://youtube.com/shorts/s6uDEcUgfr0 यह कविता बॉलीवुड के महान अभिनेता धर्मेंद्र जी के संघर्ष, अभिनय और सुपरहिट फिल्मों को समर्पित है। कविता में धर्मेंद्र जी के परिवार, उनकी कला और उनकी कालजयी फिल्मों का अद्भुत वर्णन है। पिता किशन धर्मेंद्र के, मात सतवंत कौर । बनाइ फ़िल्में तीन सौ, सभी सुनहरी भौर ।। शोले, घायल, हुकूमत— चरण, दोस्त, बेताब— जुगनू, गुलामी, इज्जत— 'वाणी' आंखें, जुर्म, काजल, ममता, दिल्लगी । सनी, देवर, शिकार, फरिश्ते, सीमा, वर्दी ।। अगर आपको कविता पसंद आए तो LIKE, SHARE और SUBSCRIBE ज़रूर करें 🙏 #Dharmendra #Poetry #BollywoodKavita Dharmendra poem Dharmendra kavita Dharmendra movies Bollywood poetry Hindi kavita Dharmendra superhit films Filmy kavita Kavita on actor Hindi poem on Dharmendra Bollywood hero Dharmendra Actor Dharmendra poetry Emotional hindi poetry Filmi kavita Kavita Hindi Bollywood legend Dharmendra #Dharmendra #DharmendraPoetry #BollywoodKavita #HindiPoetry #FilmiKavita #BollywoodLegend #Kavita #PoetryHindi #DharmendraFans
मीरा जयंती
मीरा जनमी मेड़ता , परणी प्यारा भोज ।
जनम-जनम रो सांवरो , भजन गावती रोज ।।
भजन गावती रोज , नाचती बांध घूंघरा ।
राणाजी नाराज , दक दीदा जबरा-जबरा ।।
कह 'वाणी'कविराज , करि भक्ति दुक झेलता ।
हुयो जगत में नाम , मीरा जनमी मेड़ता ।।
कृष्ण जन्माष्टमी
कृष्ण जन्माष्टमी
कन्हैया जनमे जेल में , पढ़े सुदामा संग ।
रास रचाए गोपियां , बदल-बदल के रंग ।।
बदल-बदल के रंग , जन-मन भाव विभोर ।
मारा मामा कंस , बचा न कोई उस दौर ।।
'वाणी' गीता पाठ , कर रही घर-घर मैया ।
मटकी दी लटकाय , फोड़ जाना कन्हैया ।।
उपनिवेश
उपनिवेश
जनपद उपनिवेश बना , लिए जग में अनेक ।
गए कई फिर हाथ से , आज़ाद एक-एक ।।
आज़ाद एक-एक , उत्तर-दक्षिण कोरिया ।
तब कांगो , बहरीन , शब्द- बाण फिर गोलियां ।।
'वाणी 'यूं आज़ाद , अब कितने ऐसे देश ।
रहे अब तक गुलाम , कहे जनपद उपनिवेश ।।
स्वाधीनता दिवस रहा स्वाधीनता दिवस रहा
स्वाधीनता दिवस रहा , लाल किले से बोल l
झंडा लहराता रहे , गगन गूंजते ढ़ोल ।।
गगन गूंजते ढ़ोल , जब सैनिक हैं तैनात ।
अमन-चैन संदेश , हैं सदियों की सौगात ।।
कह 'वाणी' कविराज , सुरक्षा में नवीनता ,
कोशिश सब की एक , रहे अमर स्वाधीनता ।।
विश्व शेर दिवस
जंगल के राजा रहे , सदियों से जो शेर ।
चिड़ियाघर के पिंजरे , होते रैन-बसेर ।।
होते रैन-बसेर , ताकते नव काॅलोनी ।
फैक्ट्री धुंआ देख , हॅंसे योजना सलोनी ।।
कह 'वाणी' कविराज , कटे पेड़ मन-मन कहे ।
उजड़ रहे परिवार , न जंगल के राजा रहे ।।
हाथी दिवस
हाथी वन अति सघन में , चले बना कर झुंड ।
उछले पानी सूंड से , जहाँ मिले जल-कुंड ।।
जहाँ मिले जल-कुंड , मौज मस्ताने मनाते ।
बोत्सवना वन माय , गिने सर्वाधिक जाते ।।
कह 'वाणी' कविराज , युगों के हैं ये साथी ।
क्यों तुम घटते जाय , बताओ सफेद हाथी ।।
विश्व युवा दिवस ज़वानी
ज़वानी गज़ब आग है , रुक-रुक कर सुलगाय ।
मनवा उड़ता ठान के , दसों दिशा में जाय ।।
दसों दिशा में जाय , रहें जो धुन के पक्के ।
ला कर मोती खोज , देख कर हक्के-बक्के ।।
कह 'वाणी' कविराज , रचे कुछ अमर कहानी ।
पढ़ें हज़ारों बार, हैं वही धन्य जवानी ।।
हरिशंकर परसाई व्यंग्यलेखक
व्यंग्यलेखक हरिशंकर , हुए जमानी गांव ।
होशंगाबाद जनपद , मुसीबतों की छांव ।।
मुसीबतों की छांव , सदाचार का ताबीज ।
कहानी,उपन्यास , हास्य-व्यंग्य टाकीज ।।
कह 'वाणी' कविराज , हज़ारों पढ़ते अपलक ।
हँस-हँस आंसू आय , थे ऐसे व्यंग्यलेखक ।।
रक्षाबंधन बहन
विश्व आदिवासी दिवस
विश्व आदिवासी दिवस
भारत छोड़ो आंदोलन दिवस
मुम्बई अधिवेशन में , गांधी वाक्य कराल ।।
गांधी वाक्य कराल , जय घोष ''करो या मरो' ।
कह जन-मन भूचाल , अब गोरों से मत डरो ।।
कह 'वाणी' कविराज , होगा रोज नया गज़ब ।
भागो अपने देश , अंग्रेजों छोड़ कर सब ।।
रवींद्र नाथ टैगोर ...
राष्ट्र-गान दो-दो रचे, हैं बारह नाॅवेल ।।
हैं बारह नॉवेल , गुनगुनाते गीतांजलि ।
मात शारदा लाल , कोटि-कोटि श्रद्धांजलि ।।
'वाणी' भारत रत्न , पुलकित सारे मित्रवर ।
कविता,नाटक, गीत , पेंटिंग रवींद्र कविवर ।।
राष्ट्रीय हथकरघा दिवस
कपड़े सब के खास है , साहब हो या मेम ।
भांत-भांत की क्वालिटी , पैसों का सब गेम ।।
पैसों का सब गेम , अच्छा सिस्टम पुराना ।
बहुत मिले आराम , सीखे चर्खा चलाना ।।
कह 'वाणी' कविराज फेंसिंग ड्रेसें लफड़े ।
लड़े कचहरी माय , पहन फेशन के कपड़े ।।
हिरोशिमा डे
हिरोशिमा डे
अमेरिका की द्वेषता , विश्व युद्ध के माय ।बम गिरा कर हिरोशिमा , लाखों जीव जलाय ।।
लाखों जीव जलाय , आज भी उठती लपटें ।
कीनो सभी विचार , भावी प्रलय से निपटें ।।
कह 'वाणी' कविराज ,सर्वसम्मति सहित लिखा ।
बन सकेगा ना कोय , फिर से कभी अमेरिका ।।
(अंतर्राष्ट्रीय ट्राफिक लाईट दिवस)
(अंतर्राष्ट्रीय ट्राफिक लाईट दिवस)
पहले देखो ध्यान से , दिखता कौन प्रकाश ।।
दिखता कौन प्रकाश , लाल कहे ठहर जाओ ।
पीला हो तैयार , हरा देख गति बढ़ाओ ।।
'वाणी' सबको मान , ढंग से चल बेढ़ंगी ।
पुलिस रोकती देख , लाइटें रंग-बिरंगी ।।
(किशोर कुमार जयंती)..
राणा उदय सिंह जयंती
राणा उदय सिंह जयंती
उदयसागर झील बणा , उदयपुर द्यो बसाय ।।
उदयपुर द्यो बसाय , लाय भारमल हमचार ।
अकबर संधि प्रस्ताव , राणा कीनो इंकार ।।
'वाणी' सब सामंत , गूंज उठी यूं जय-जय ।
लड़ा आखरी सांस , आज़ादी प्यारी उदय ।।
ज्ञान चतुर्वेदी (व्यंग्यकार....
ज्ञान चतुर्वेदी (व्यंग्यकार
ज्ञान चतुर्वेदी हुए , यशस्वी व्यंग्यकार ।
चिकित्सक हृदय-रोग के , पद्म श्री पुरस्कार ।।
पद्म श्री पुरस्कार , कहानियां व उपन्यास ।
'बारामासी' खास , उपहास से रचे हास ।।
कह 'वाणी' कविराज , भांत-भांत के सम्मान ।।
मिला विरासत माय , दादा-नाना से ज्ञान ।।
राष्ट्रीय बहन दिवस ...
इक धन से पिछड़ा अगर, एक करोड़ों पास ।।
एक करोड़ों पास , न देना और न लेना ।
सब सिक्कों के खेल , झंझटों की है सेना ।।
कह 'वाणी' कविराज , सुख-दुःख अपने सहने ।
रखें सभी से प्रेम , सुने समझदार बहनें ।।






