खेल दिवस
शुरुआत करो खेल की, ऐसा मिलाय मेल ।
खेल-खेल सब सीख लें , जो खेलेंगे खेल ।।
जो खेलेंगे खेल , देख ध्यान चंद हॉकी ।
स्वर्ण पदक ले तीन , कोई कसर ना बाकी ।।
कह 'वाणी' कविराज , दिन और चांदनी रात ।
किया गज़ब अभ्यास , जहां खेल की शुरुआत ।।