ऋषि पंचमी





ऋषि पंचमी 

परम पूज्य ऋषिवर सभी , राम जीवनाधार  ।

पाया तप बल योग से , जो जग मूलाधार  ।। 

जो जग मूलाधार , वेद-ऋचाएं बोलती  ।

यज्ञ वंदना पाठ , मानस के पट खोलती  ।।

'वाणी' यश फैलाय , भारद्वाज अत्री गौतम  ।

कश्यप विश्वामित्र , जमदग्नि वशिष्ट परम  ।।