📜 कविता (Kundli Kavya) - 'संविधान दिवस'
संविधान इस देश का, सब धर्मों का मान।
संशोधन संभावना, बड़ा विचित्र विधान।।
बड़ा विचित्र विधान, 'राष्ट्रीय कानून दिवस'।
सुनो पुराना नाम, यह लगे आज भी सरस।।
'वाणी' थे बी.आर., प्रसिद्ध नियामक महान।
प्रजातंत्र जो दिया, सराहे सब संविधान।।