Rojgaar sabko mile / रोजगार सबको मिले - Paryavaran Ke Dohe @ Kavi Amrit 'Wani' (PD111)

जनसंख्या जब कम रहे, अच्छे होय विकास।
रोजगार सबको मिले, सुन्दर हो आवास ।।

शब्दार्थ :- रोजगार =जीविकोपार्जन हेतु आय के स्त्रोत, निवास = रहने हेतु मकान

भावार्थ:- देश  के चहुमुंखी विकास में जनसंख्या का बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान है। यदि आबादी कम होगी या बहुत ही कम गति से बढ़ेगी तो सभी को पर्याप्त सुख-सुविधाएं उपलब्ध हो सकेगी । आशा के अनुरूप देश का विकास होना संभव होगा । सभी को अपनी-अपनी योग्यता, क्षमता व अनुभवानुसार रोजगार भी उपलब्ध हो सकेेंगे । देश में सर्वत्र खुशहाली रहेगी। ’वाणी’ कविराज यह कहना चाहते हैं कि जनसंख्या विस्फोट भारत वर्ष की ज्वलंत समस्या हैं। इस पर शीध्र ही विचार-विमर्ष करते हुए स्वनिय निर्णय की प्रवृत्ति विकसित करना अतिआवश्यक  है।




Kar Sabaka Sammaan / कर सबका सम्मान - Paryavaran Ke Dohe @ Kavi Amrit 'Wani' (PD110)

पार नही है ज्ञान का, कभी न कर अभिमान।
नया-नया रोज़ पढ़ना, कर सबका सम्मान।।

शब्दार्थ :- बढ़ते रहो = बौद्धिक विकास करना,

भावार्थ:- संसार में कई प्रकार के विषय है । ज्ञान-वृक्ष की क्रोटि कोटि ष्षाखाएं है एक-एक डाली पर अनन्त पत्ते है ऐसी अन्नत जालियां है सामान्य व्यक्ति जीवनी में उस वट वृक्ष की एक शाखा का भी किंचित ज्ञान ही प्राप्त कर सकता है । इसलिए किसी भी विद्वान को अपने ज्ञान व अनुभव पर अभिमान कदापि नहीं करना चाहिए । ’वाणी’ कविराज कहते है। कि स्वाध्याय द्वारा प्रतिदिन अध्ययन करते रहना चाहिए । ज्ञान के साथ-साथ यदि विनम्रता भी जीवन में आ जाती है । तो वह व्यक्तित्व अवश्य ही चिरस्मरणीय बन जाता है। विद्धान व अनुभवी व्यक्तियों को चाहिए कि वे अपने ज्ञान को सुपात्रों में अनवरण बांटते रहें ।






Janavaron Ko Palate / जानवरों को पालते - Paryavaran Ke Dohe @ Kavi Amrit 'Wani' (PD109)


जानवरों को पालते, सुनो बाल गोपाल।
प्रशिक्षण में सब सीखलो, लो संग ग्वाल-बाल।।

शब्दार्थ :- गोपाल = गायों को पालने वाले, ग्वाल-बाल = पशु  पालकों की दिन भर साथ रहने वाली मित्र-मण्डली

भावार्थ:- ’वाणी’ कविराज कहते है कि हे पषुपालकों हे गोपालों । तुम सब हमारी एक बात सदैव ही याद रखों कि यदि आप पशुपालन से संबंधित कोई प्रशिक्षण प्राप्त कर लेते हैं तो यह आपके व्यावहारिक एंव सैद्धान्तिक ज्ञान को अवष्य बढाएगा । जानवरों के सामान्य आहार, रोग, निदान संबंधी पर्याप्त जानकारियां आपको प्रशिसण द्वारा हासिल हो जाएगी। इससें आप काफी सुविधा अनुभव करंगे । अपने साथियों को भी अपपने ज्ञान से लाभन्वित कर सकेगें। कई दृष्टिकोणों से उपयोगी यह प्रशिक्षण सभी पशु पालकों को प्राप्त करने का अवसर मिलना अपेक्षित है।






Jangal Me Mangal Rahe /जंगल में मंगल रहे - Paryavaran Ke Dohe @ Kavi Amrit 'Wani' (PD108)

मानवीय शिक्षा मिले, सारे करें प्रयास।
जंगल भी मंगल बने, ऐसा होय विकास।।

शब्दार्थ :- जंगल में मंगल = अतिसाधारण परिस्थितियों में भी अच्छा जीवन बिताना ।

भावार्थ:- ’वाणी’ कविराज कहना चाहते हैं कि सभी व्यक्तियों को मानवीय षिक्षा एवं जीवन के अनुभवों को आत्मसात करने के पर्याप्त अवसर मिलते रहने चाहिए। कम से कम वह इतना सीख ले कि यह मनुष्य जीवन क्या है ? इस जीवन में कौन से कार्य अधिक करने चाहिए और कौन से कार्य नहीं करने चाहिए । इतना प्रयास हर प्रशासन व हर नागरिक को करना चाहिए। ऐसे ज्ञानार्जन के पष्चात् ही हम ईष्वार प्रस्त साधारण सी सुख सुविधाओं में भी श्रेष्ठ जीवन व्यतीत कर सकेंगें। सभी के विकास की मंगल भावनाओं को लेकर कदम से कदम मिलाकर चलने का हाथ, से हाथ मिला कर साथ चलने के फायदां को आम आदमी समझ सकेगें, ऐसी व्यवस्थाऐं सर्वत्र उपलब्ध कराई जानी अपेक्षित हैं।






Dhara Chabbis Lagti /धारा छब्बीस लगती - Paryavaran Ke Dohe @ Kavi Amrit 'Wani' (PD107)

धारा छब्बीस लगती, सजा नब्बे दिन पाय।
जुर्माना है पांच सौ, सुधर-सुधर सब आय।।

शब्दार्थ :- जुर्माना = आर्थिक दण्ड

भावार्थ:- पशुओं  पर क्रूरता संबंधित अधिनियम के अन्तर्गत ही धारा 26 के अनुसार कोई निर्दयी व्यक्ति धारा 22 के अन्तर्गत यदि पषुओं द्वारा प्रदर्शन  (खेल) करता है उसके करतेव्यों से लोगों का मनोरंजन करता है तो इसे भी अपराध की श्रेणी में मानते हुए 500 रू. तक आर्थिक दण्ड या तीन माह की जेल की सजा दिए जाने का प्रावधान हैं। ’वाणी’ कविराज कहते हैं कि अपराध की गंभीरता को देखते हुए उसे दोनों ही प्रकार के दण्ड दिए जा सकते हैं। जब ऐसे निर्दयी व्यक्ति जेल की सजा भुगतेंगे तो अवष्य ही उनकी बेरहमी में अर्थात् उनकी निर्दयता में काफी कमी आएगी ।