Aids Ban Na Paye Mahamari - एड्स बन न पाए महामारी #Aids_Pe_Nare @ Kavi Amrit 'Wani (AD04)


आओ अटकलें लगाएं सारी । एड्स बन न पाए महामारी ।।

भावार्थ
आज एड्स विश्व में सर्वाधिक तेजी से बढ़ने वाला रोग है । प्रतिदिन सैकडो नहीं हजारों नए रोगी इसकी चपेट में आ रहे हैं । यदि हम सबने मिलकर इस ओर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया, आम जनता को सही एवम् आवश्यक जानकारियां नहीं दी और समझदार होकर भी समाज और राष्ट्र के प्रति लापरवाह बने रहे तो वह दिन दूर नहीं होगा जिस दिन एड्स महामारी का रूप धारण कर लेगा । तब हमारे द्वारा किए गए छोटे-मोटे सारे प्रयास ऊंट के मुंह में जीरे की भाति प्रभावहीन हो जाएंगे । 'वाणी' कविराज कहना चाहते हैं कि आओ, हम सच विचार गोष्ठी में चलें कार्यशालाएं आयोजित करें और सुरसा के मुंह की भांति बढ़ती हुई इस महामारी पर विजय पाने की सफल रणनीतियां बनाएं ।  




Aids Rog kisi ko hoy nahi - एड्स रोग किसी को होय नहीं #Aids_Pe_Nare @ Kavi Amrit 'Wani (AD03)


एड्स रोग किसी को होय नहीं । दुनियां में इसका उपचार नहीं ।।


भावार्थ
मानव शरीर में कई बार कई बीमारियां ऐसी होती हैं जो बिना किसी विशेष कारणों के आ जाती और दो-पांच दिनों में विना दवाओं के ही चली जाती है । एड्स एक ऐसा रोग है जो वैसे तो मौसमी बीमारियों की तरह रस्ते चलते हर किसी को होता नहीं, किन्तु यदि एक बार यह महारोग किसी को पकड़ लेता है तो फिर उसको प्राण लेकर ही छोड़ता, क्योंकि आज तक इस रोग का कोई टीका नहीं बन पाया और न ही इस पर पूर्णतया विजय पाने वाली औषधियां बन पाई हैं । 'वाणी' कविराज कहना चाहते हैं कि ईश्वर और प्रकृति तो आपकी मदद करेंगे ही किन्तु इससे पहले आप स्वयं अपने जीवन को ऐसी उच्च नैतिकता के साथ सुचारू ढंग से व्यतीत करने का सुदृढ मानस बनाएं कि आपके जीवन में ऐसे अचानक जान लेवा रोगों की सम्भावनाएं पूर्णतः समाप्त हो जाए ।



Samajho Aids Ki Hui Bimari - समझो एड्स की हुई बीमारी #Aids_Pe_Nare @ Kavi Amrit 'Wani (AD02)


मरती जाये जब सेना सारी । समझो एड्स की हुई बीमारी ।।
भावार्थ
एड्स के वायरस शरीर में प्रवेश पाने के पश्चात् 10-12 सप्ताह तक तो पूर्णतः निष्प्रभावी रहते हैं, किन्तु इस समयावधि के पश्चात् उक्त्त वायरस सक्रमित शरीर के सूल में स्थित श्वेत रक्त कणिकाओं को नष्ट करना प्रारम्भ कर देते हैं । श्वेत रक्त कणिकाएं हर मानव शरीर में 24 घण्टे तैयार एक विशाल सेना की भांति हर मोर्चे पर तैनात रहती है, जिसे एड्स के वायरस धीर-धीरे नष्ट करना प्रारम्भ कर देते हैं । प्रयोगशाला द्वारा स्वत इत्यादि के परीक्षणोपरान्त यदि यह पाया जाता है कि प्रतिदिन रक्त में श्वेत कणिकाओं की मात्रा कम होती जा रही तो शीघ्र ही यह दिन दूर नही जिस दिन इनकी संज्या शून्य के समकक्ष हो जाएगी । उस स्थिति में ऐसे रोगी को एड्स शासित रोगी कहा जायेगा । वह रोगी लाइलाज है ।



Sare Baiktriya Tab Nikale - सारे बैक्ट्रिया तब निकले #Aids_Pe_Slogans @ Kavi Amrit 'Wani (AD01)

सारे बैक्ट्रिया तब निकले ।

बीस मिनट तक सूई उबले ।।

भावार्थ अधिकांश बीमारियां विभिन्न प्रकार के बैक्ट्रिया के द्वारा फैलती है । शरीर में किसी भी प्रकार से बेविट्या के प्रवेश कर लेने के बाद वे धीरे-धीरे लाखों की तादाद में स्वजाति रोगाणुओं की संख्या बढ़ा लेते हैं । यदि शरीर की रोग प्रतिरोधात्मक क्षमता कमजोर है तो उस बैक्ट्रिया का प्रभाव ज्यादा एवं शीघ्र होगा । प्रथम प्रयास हमें यह करना चाहिए कि ऐसे विषाणु हमारे शरीर में प्रवेश ही नहीं कर पाएं । इंजेक्शन की सूई के द्वारा भी ये शरीर में प्रवेश कर सकते हैं । सूई को 20 मिनट तक उबलते पानी में रखते हुए रोगाणुओं को पूर्णतः नष्ट किया जा सकता है । नई डिस्पोजल सीरिज के वनिस्पत 20 मिनट तक उबली हुई |



ag mein jeevan neer hai / जग में जीवन नीर है - Paryavaran Ke Dohe @ Kavi Amrit 'Wani' (PD112)


जग में जीवन नीर है, सुन जग जीवनराम।
राम-राम तुम फिर करो, पहले नल का काम।।

शब्दार्थ :- नीर = पानी

भावार्थ:- पृथ्वी पर 3/4 भाग पानी होना ही इस बात का प्रमाण है कि जल ही इस संसार का प्रमुख आधार है । आवश्यकतानुसार सुनियोजित ढंग से ही पानी का उपयोग किया जाना चाहिए । हे जगजीवनराम, तुम इन बातों को बड़े ही ध्यान से सुनते हुए जीवन में उतारलो । ’वाणी’ कविराज कहते हैं कि भक्तिभाव मे राम राम का स्वमरण भी तुम थोड़ी देर बाद कर लेना यदि उस वक्त नल में पानी आ गया और पानी व्यर्थ बह रहा है तो पहले उस नल को बन्द करें भरे जल पात्र भीतर लाकर खाली करके रखते हुए तुम कुन्त भक्ति करने बैठ जाओं । राम-राम करते हुए पुण्य लाभ के प्रभाव से नल भी अवष्य ज्यादा आऐगें ।