शनिवार, 6 फ़रवरी 2010

आंबा वाया मोकळा

आम्बा वाया मोकळा , देशी नाक्यो खाद
पोता-पोती खावता , मने करेगा याद ।।
मने करेगा याद , गजब का हा दादाजी
ग्या बेकुंठा माय , कहे धरती माताजी ।।
केवाणीकविराज, होचजो लोग-लुगाया
कुण-कुण करसी याद, थां कई आम्बा वाया ।।


3 टिप्‍पणियां:

ललित शर्मा ने कहा…

थ्हे घणी चोखी बातां करी कविराज,
आंबा बाओ तो सबरो सर जासी काज।
लोग लुगायां ओर बुढा टाबर मोट्यार,
हेंग खासी आबां ओर थाने करसी याद।

राम राम

ओ शब्द पुष्टिकरण हटा दयों। कोनी आवे तो म्हाने पु्छ ल्यों। एक बार पैंला भी खेह्यो थो थाने।

amritwani.com ने कहा…

lalit ji bahut bahut dhanyawad aap ko jo aap ne hamari rajasthani kavya kundli ka jawab behad sudhar tarike se rakasthani me diya

aap ka dhanaywad

amritwani.com ने कहा…

ललित जी हमने शब्द पुष्टि हटा दी हे