कुछ दिखे कुछ दिखे नहीं, करे रोग बीमार ।
धवल नयन चमड़ी धवल,
रोगी हुए हजार ।।
रोगी हुए हजार, मुश्किल उनका उपचार ।
रहते उनसे दूर, दूर-दूर दे समाचार ।।
कह 'वाणी' कविराज, अपना जान सोचो कुछ ।
जब नियमित हो जांच, तब होय अच्छा सब कुछ ।।
कवि अमृत 'वाणी'
कुछ दिखे कुछ दिखे नहीं, करे रोग बीमार ।
धवल नयन चमड़ी धवल,
रोगी हुए हजार ।।
रोगी हुए हजार, मुश्किल उनका उपचार ।
रहते उनसे दूर, दूर-दूर दे समाचार ।।
कह 'वाणी' कविराज, अपना जान सोचो कुछ ।
जब नियमित हो जांच, तब होय अच्छा सब कुछ ।।
विमान हादसा अहमदाबाद
12th June
पुर्जा-पुर्जा कामका, करता खुद पर नाज ।
पूछना इत्मिनान से, कैसा आज मिजाज ।।
कैसा आज मिजाज, पूछो उससे हर बार ।
बोल जिगर कुछ बोल, निभाना वही किरदार ।।
कह 'वाणी' कविराज, कल-कल करे कल-पुर्जा ।
तनिक करो न विलंब, तत्काल बदलो पुर्जा ।।
कवि अमृत वाणी