गुनाह


गुनाहों की दुनिया में
ह्म
हर गुनाह से बचते रहे
इसीलिए कि हमारे
नन्हें मासूम बच्चे हैं
मगर
बेगुनाह होना ही
कितना बड़ा गुनाह हो गया
कि
आज कल गुनहगारों की बस्ती में
बेगुनाहों के घर
सरे आम तबाह हो रहें |

पैसा

पैसा ऐसी धार है , बनती आंसू धार |
धार उधारी झेलते , डूब गए मंझधार ||
डूब गए मंझधार , गाते सब अपने गीत |
प्यारी प्यारी राग , सुने नहीं कोई मीत ||
कह 'वाणी' कविराज , हाल बिगड़ा है ऐसा |
पैसा मांगे लोग , हम मांगे पैसा - पैसा ||


सच्चे गुरु

सच्चे गुरु को
सच्चा शिष्य मिल जाना
एक नवीन सशक्त क्रांति का
बीजारोपण है

चवन्नी और अठन्नी

आज कल
जहाँ देखो वहाँ
कई मितव्ययी दांत
पराई अठन्नी को भी
इतनी जोर से दबाते हैं
कि
बेचारी अठन्नी
दबती - दबती चवन्नी बन जाती

जब भी
वह खोटी चवन्नी निकलती
इतनी तेज गति से निकलती
कि उन कंजूस सेठों का जबड़ा ही
बाहर निकल जाता
और
इस एक ही झटके में शरीर की
नस नस की बरसों पुरानी
लचक निकल जाती
फिर
फिर तो उन्हें जाना ही पड़ता
खेतों पर पसीना बहाने


उधर जो सही समय पर
सही तरीके से
लक्ष्मी के मंत्रों का जप कर रहा होता
उसके मुंह में
चवन्नी और जबड़ा
अपने आप फिट हो जाता |


फिर, फिर तो
उसकी शक्ल पहचानने में नहीं आती
और आएगी भी कैसे
क्योंकि
मुंह उसका
जबड़ा दूसरे का
चवन्नी किसी तीसरे की |

अमृत 'वाणी'

एक्स्ट्रा क्लास

बस्ता उठा टिंकू चला , चार चोराहे पार |
थक कर जब स्कूल पहुंचा , पता लगा रविवार ||
पता लगा रविवार , नहीं बजेगा घंटा घंटी |
पड़ेगी घर पर मार , नहीं कल की गारंटी ||
फिर चलाया दिमाग , मम्मी करनी कक्षा पास |
जाना   हर रविवार , चलेगी अब एक्स्ट्रा क्लास ||