चवन्नी और अठन्नी

आज कल
जहाँ देखो वहाँ
कई मितव्ययी दांत
पराई अठन्नी को भी
इतनी जोर से दबाते हैं
कि
बेचारी अठन्नी
दबती - दबती चवन्नी बन जाती

जब भी
वह खोटी चवन्नी निकलती
इतनी तेज गति से निकलती
कि उन कंजूस सेठों का जबड़ा ही
बाहर निकल जाता
और
इस एक ही झटके में शरीर की
नस नस की बरसों पुरानी
लचक निकल जाती
फिर
फिर तो उन्हें जाना ही पड़ता
खेतों पर पसीना बहाने


उधर जो सही समय पर
सही तरीके से
लक्ष्मी के मंत्रों का जप कर रहा होता
उसके मुंह में
चवन्नी और जबड़ा
अपने आप फिट हो जाता |


फिर, फिर तो
उसकी शक्ल पहचानने में नहीं आती
और आएगी भी कैसे
क्योंकि
मुंह उसका
जबड़ा दूसरे का
चवन्नी किसी तीसरे की |

अमृत 'वाणी'

एक्स्ट्रा क्लास

बस्ता उठा टिंकू चला , चार चोराहे पार |
थक कर जब स्कूल पहुंचा , पता लगा रविवार ||
पता लगा रविवार , नहीं बजेगा घंटा घंटी |
पड़ेगी घर पर मार , नहीं कल की गारंटी ||
फिर चलाया दिमाग , मम्मी करनी कक्षा पास |
जाना   हर रविवार , चलेगी अब एक्स्ट्रा क्लास ||


सांप हमें क्या काटेंगे !!


सांप हमें क्या काटेंगे
हमारे जहर से
वे बेमौत मरे जायेंगे
अगर हमको काटेंगे ?

कान खोल कर सुनलो
विषैले सांपो
वंश समूल नष्ट हो जायेगा
जिस दिन हम तुमको काटेंगे
क्यों

क्योंकि
हम आस्तीन के सांप हे |


अमृत 'वाणी'

अब हमको देना वोट



महंगाई की मार पड़ी , दिया कमर को तोड़ |
हो गए हम विकलांग सभी , खड़े हैं  सब हाथ जोड़ ||
खड़े हें सब हाथ जोड़ , कौन  पूंछे हाल हमारे |
साथी सब गये छोड़ , दूर बहुत हैं किनारे ||
मंत्री जी समझाए , दिया उनको तुमने वोट |
नहीं रहे कमर एसी अब  हमको देना वोट ||




हे खुदा !

हर इंसा की जिंदगी में
कम से कम एक बार
एक ऐसा दौर आना चाहिए कि
उस दौर के दौरान वो शख्स
हर दौर से गुज़र जाना चाहिए |

अमृत 'वाणी'


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