राम चालीसा

कौशल्या का लाडला ,केवे जग जगदीश ।
किरपा करदो मोकली ,रोज नमावां सीस ||
हुणजो माता जानकी ,दया करे रघुवीर ।
चार पुरसारथ मले, ओर मले महावीर ।।



भोजन की मात्रा


भोजन की उतनी ही मात्रा अमृत के समान है,
जिसे ग्रहण करने के बाद आप को,
किसी
भी कार्य में बाधा उत्पन्न नहीं होय |


हो कामयाब हर मंजिल

मंजिल यँू बढ़ती रहे, बने वह विजय-स्तम्भ ।
अजातशत्रु सभी यहाँ, बने प्रकाश-स्तम्भ ।।
बने प्रकाश-स्तम्भ, जगत सौ-सौ सुख पावें ।
समझ कर वास्तु-ज्ञान, स्वर्ग-सा सदन बनावें ।।
कह `वाणी´ कविराज, होय सभी पल-पल सफल ।
कष्ट कभी ना होय, हो कामयाब हर मंजिल ।।

अमृत `वाणी'


आज का आदमी


आज का आदमी
अपनी गरीबी के कारण
बहुत कम
और
पडोसियों की तरक्की से

बहुत
ज्यादा दुखी है

अमृत 'वाणी'