गुरुवार, 11 मार्च 2010

वें हजारों बार जीए


शहरों में कई लोग
इसलिए मर रहें
कि
उन्हें जीना नहीं आया
और कई लोग
महज
इसीलिए जी रहें कि
उन्हें मौत नहीं आ रही ।

बचे हुए लोग
रो रहे
कुछ उनके वास्ते
जो बेमौत मर गए
कुछ उनके वास्ते
जो
न जाने कब मरेंगे ।

चंद भले लोग
चंद भले लोगों के लिए
रोज
दुआएं कर रहे हैं
हे प्रभु !
वें हजारों साल जीएं
हे प्रभु !
वे हजारों बार जीएं ।।

3 टिप्‍पणियां:

Suman ने कहा…

nice

rajiv varma ने कहा…

yahi hal he aaj ki nai pidi ka


dunia ko bahut badal diya he is sadi ne




mumbai

राकेश कौशिक ने कहा…

शब्द, भाव तथा प्रस्तुति अच्छी लगी.