झटपट बरसादो पाणी

आज का आदमी


आज का आदमी
अपनी गरीबी के कारण
बहुत कम
और
पडोसियों की तरक्की से

बहुत
ज्यादा दुखी है

अमृत 'वाणी'

सब जानते


सब जानते
तू
भी कभी
मजबूत पहाड़ था ,
आज मिटता-मिटता हो गया
छोटा सा कंकर I
मगर
तनिक भी चिंता मत कर
केवल दो बातें ध्यान रखा कर
पहली बात
मौके
की तलाश में
तुझे रात-दिन फिरना है
दूसरी बात
तुझे
कब कहाँ और किसकी आँख में
कैसे गिरना है I



अमृत 'वाणी '
सेंती चित्तौड़गढ़