अंतर्राष्ट्रीय भ्रष्टाचार निरोध दिवस 2025 || 9 दिसम्बर 2025 || कवि अमृत 'वाणी' #anticorruptionday

 






अंतर्राष्ट्रीय भ्रष्टाचार निरोध दिवस पर कवि अमृत 'वाणी' की शक्तिशाली कविता! भारत में सुरसा की तरह फैल रहे भ्रष्टाचार के नए-नए रूपों और करोड़ों के घोटालों पर यह कविता एक तीखा व्यंग्य करती है। यह कविता उस कड़वी सच्चाई को दर्शाती है कि कैसे बड़े-बड़े नाम इस दलदल में शामिल हैं और देश का धन विदेशों में बह रहा है। लोकतंत्र के आधार को खोखला कर रहे इस भ्रष्टाचार पर 'वाणी' (कवि) का आक्रोश और चिंतन इस गीत के माध्यम से प्रस्तुत है। आइए, 9 दिसंबर को इस अंतरराष्ट्रीय दिवस पर, हम सब मिलकर भ्रष्टाचार मुक्त भारत का संकल्प लें। 📜 कविता अंतर्राष्ट्रीय भ्रष्टाचार निरोध दिवस भ्रष्टाचार बन सुरसा , नए-नए ले रूप । सब एक से एक बढ़े , गिन-गिन थके कुरूप ।। गिन-गिन थके कुरूप, करोड़ों के घोटाले । बड़े-बड़े हैं नाम , किसे रखें किसे टाले ।। 'वाणी' बहाय नीर , नहीं लोकतंत्राधार । देश का धन विदेश , कब तक है ! भ्रष्टाचार । 💡 कविता का भावार्थ (Bhavarth) कवि कहते हैं कि भ्रष्टाचार एक राक्षसी रूप (सुरसा) धारण करके लगातार नए-नए तरीके और रूप ले रहा है। भ्रष्टाचार करने वाले लोग एक-दूसरे से आगे निकलने की होड़ में हैं, और उनकी संख्या इतनी अधिक है कि उन बुरे चेहरों (कुरूपों) को गिनना भी मुश्किल हो गया है। आज देश में करोड़ों-करोड़ों के घोटाले हो रहे हैं, जिनमें बहुत बड़े और नामचीन लोग शामिल हैं। यह समझना कठिन है कि किसे दोषी मानें और किसे छोड़ दें। कवि 'वाणी' दुःख और वेदना के आँसू बहाते हुए कहते हैं कि इस भ्रष्टाचार के कारण देश का लोकतंत्र खतरे में है और उसका आधार नष्ट हो रहा है। देश का धन लगातार विदेश भेजा जा रहा है। कवि अंत में समाज और व्यवस्था से यह सवाल पूछते हैं कि यह अनियंत्रित भ्रष्टाचार कब तक चलता रहेगा! भ्रष्टाचार (Bhrashtachar): अनैतिक या गैर-कानूनी तरीके से पद या शक्ति का दुरुपयोग। सुरसा (Sursa): हिंदू पौराणिक कथाओं में एक राक्षसी, जो अपना मुंह लगातार बड़ा करती जाती थी। यहाँ इसका प्रयोग 'अत्यधिक विस्तार' या 'राक्षसी फैलाव' दिखाने के लिए किया गया है। कुरूप (Kuroop): बदसूरत, भद्दा। यहाँ इसका प्रयोग भ्रष्टाचारी लोगों के लिए किया गया है, जिनका चरित्र और कृत्य बुरा है। टाले (Taale): अनदेखा करें या छोड़ दें। वाणी (Wani): कवि का उपनाम (छद्म नाम)। नीर (Neer): आँसू या पानी। 'नीर बहाय' का अर्थ है: दुःख व्यक्त करना या रोना। लोकतन्त्राधार (Loktantradhar): लोकतंत्र का आधार। गीतकार (Lyricist): Kavi Amrit ‘Wani’ (Amrit Lal Changeriya - Kumawat) अवधारणा (Concept By): Mr. Deepak Mehta निर्माता (Producer): Mr. Ram Ratan Kumawat निर्देशक (Director): Mr. Harshit Jingar 🎤 संगीत एवं तकनीकी विवरण स्वर (Vocalist) : Suno App (Ai Tools) संगीत निर्माता (Music Producer) : Miss. Krishna संपादक (Editor) : Mr. Abhay Singh छायांकन (Cinematography) : Miss Tanisha Kumawat 🤖 एआई प्रोडक्शन क्रेडिट्स (AI Production Credits) एआई विज़ुअल आर्टिस्ट (Ai Visual Artist): Gemini / Grok प्रॉम्प्ट इंजीनियर (Prompt Engineer): Mr. Ram Ratan Kumawat 🙏 विशेष आभार (Special Thanks) Dr. Chandra Shekhar Changeriya, Mr. Chandra Prakash Ameta #InternationalAntiCorruptionDay #भ्रष्टाचार_बन_सुरसा #9December #कविअमृतवाणी #भ्रष्टाचारमुक्तभारत #कालेधनपरवार #CorruptionInIndia #एंटीकरप्शनडे #AntiCorruptionPoem #KaviAmritWani #DeepakMehtaConcept #ChetanProductionMusic #Kumawat #कविता #गीत #देशप्रेम