रविवार, 24 जनवरी 2010

लौटेगी हरियाली


हरियाली घटती रही , हुए जंगल वीरान |
चिंता सताए शेर को , सब कुछ क्यों वीरान ||
सब कुछ क्यों वीरान , आज कैसे दिन आए |
नहीं जंगली जीव, खाएं तो किसे खाए ||
कह 'वाणी' कविराज , पीओ चाय की प्याली |
लगा रहे हम पेड़ , लौटेगी हरियाली ||

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