शनिवार, 14 अगस्त 2010

वंदे मातरम् मिल कर गाए

आओ ऐसे दीप जलाए |
अंतर मन का तम मिट जा ||

मन निर्मल ज्यूं गंगा माता |
राम भरत ज्यूँ सारे भ्राता ||

रामायण की गाथा गाए |
भवसागर से तर तर जा ||

चोरी हिंसा हम दूर भगाए |
वंदे मातरम् मिल कर गाए ||




कवि अमृत 'वाणी'



11 टिप्‍पणियां:

Sunil Kumar ने कहा…

मन निर्मल ज्यूं गंगा माता |
राम भरत ज्यूँ सारे भ्राता ||
सुंदर अभिव्यक्ति ,बधाई

महेन्द्र मिश्र ने कहा…

बढ़िया रचना ...
स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर हार्दिक शुभकामनाएं.

Virendra Singh Chauhan ने कहा…

Bade sunder vichaar hai aapke.

Mujhe ye post achhi lagi

स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर हार्दिक शुभकामनाएं.

Sonal ने कहा…

स्‍वतंत्रता दिवस के मौके पर आप एवं आपके परिवार के सभी सदस्यों को शुभकामनाएं और बधाई !

Meri Nayi Kavita par Comments ka intzar rahega.....

A Silent Silence : Hum Kyu Bade Hue...

Banned Area News : Karnataka News

परमजीत सिँह बाली ने कहा…

bahut sundar!!


स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर हार्दिक शुभकामनाएं.

Rajendra Swarnkar ने कहा…

कुमावत जी
स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर हार्दिक शुभकामनाएं !
आओ ऐसे दीप जलाएं |
अंतर मन का तम मिट जाए ||

मन निर्मल ज्यूं गंगा माता |
राम भरत ज्यूं सारे भ्राता ||

रामायण की गाथा गाएं |
भवसागर से तर तर जाएं ||


अच्छी रचना के लिए बधाई !
भाईसाहब को नमन !
- राजेन्द्र स्वर्णकार
शस्वरं

नीरज गोस्वामी ने कहा…

भाव पूर्ण रचना...सुन्दर शब्द , सुन्दर भाव....स्वतंत्रता दिवस की बधाई...
नीरज

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

बन्दी है आजादी अपनी, छल के कारागारों में।
मैला-पंक समाया है, निर्मल नदियों की धारों में।।
--
मेरी ओर से स्वतन्त्रता-दिवस की
हार्दिक शुभकामनाएँ स्वीकार करें!
--
वन्दे मातरम्!

हास्यफुहार ने कहा…

बहुत अच्छी प्रस्तुति।

kase kahun?by kavita. ने कहा…

bahut sundar abhivyakti...

पद्म सिंह ने कहा…

बढ़िया रचना ... मगर ध्यान रहे ... सेक्युलरिस्ट घूम रहे हैं इधर उधर