मंगलवार, 24 अगस्त 2010

खुश रहे बहिनें

खुश रहे बहिनें , पल पल यही ख्याल आए |
आफ़त के वक़्त भाई बहन की ढ़ाल बन जाए ||

करता रह इस तरहां तू हिफाजत अपनी बहनों की |
कि हुमायूँ से भी बेहतर तेरी मिशाल बन जाए ||






कवि :-अमृत'वाणी'

शनिवार, 14 अगस्त 2010

वंदे मातरम् मिल कर गाए

आओ ऐसे दीप जलाए |
अंतर मन का तम मिट जा ||

मन निर्मल ज्यूं गंगा माता |
राम भरत ज्यूँ सारे भ्राता ||

रामायण की गाथा गाए |
भवसागर से तर तर जा ||

चोरी हिंसा हम दूर भगाए |
वंदे मातरम् मिल कर गाए ||




कवि अमृत 'वाणी'



सोमवार, 2 अगस्त 2010

चार दिनों की जिन्दगी

चार दिनों की जिन्दगी
यूं
गुजर गई भाई |
दो दिन
हम सो ना सके
दो दिन
नींद नहीं आई

कवि अमृत"वाणी"