मंगलवार, 27 जुलाई 2010

चार दिनों की जिन्दगी

चार दिनों की जिन्दगी
यूं
गुजर गई भाई |
दो दिन
हम सो ना सके
दो दिन
नींद नहीं आई

कवि अमृत"वाणी"

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