गुरुवार, 3 जून 2010

झटपट बरसादो पाणी

कवि:- अमृत'वाणी'

2 टिप्‍पणियां:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

बहुत सुन्दर कुण्डलिया लिखी है आपने!

संजय कुमार चौरसिया ने कहा…

bahut sunder

http://sanjaykuamr.blogspot.com/