सोमवार, 22 मार्च 2010

बहरे कई प्रकार के



बहरे      कई   प्रकार   के,    भांत -     भांत   के लाभ |
जब तक काम पड़े  नहीं, तब तक लाभ ही लाभ ||
तब तक लाभ ही लाभ ,  चिल्ला कर वक्ता  कहे |
मन मन हँसता जाय , वक्ता का  पसीना बहे ||
कह 'वाणी' कविराज , पोस्ट   मेन  एमो लाया |
सुनी  एक आवाज ,तीन मंजिल  कूद आया ||

1 टिप्पणी:

ललित शर्मा ने कहा…

कुंडली तो चोखी कही भाया।
बहरो दिमाग को घणो तेज होया करे।
ओ ध्यान राखण री बात हे।

राम-राम