रविवार, 7 मार्च 2010

ओटेमेटिक घड़ी

ऐ मेरी
ओटेमेटिक घड़ी
काश मैंने तुझसे
इतना ही सीख लिया होता
बस मुझे चलना है
तेरी तरह

सर्दी-गर्मी-बरसात
आंधी-तूफां
दिन हो या रात
राह में
फूल हो या कांटे
हर हाल में चलना है
हर दिन
दिन-रात चलना है

अगर
इतना ही सीख लिया होता
तो आज
मेरी घड़ी
इतनी नाजुक नहीं होती

अच्छे-अच्छे
घड़ी-घड़ी
मेरी घड़ी से
उनकी घड़ी मिलाते


बेशक
मेरी घड़ी
आज
वो घड़ी होती