गुरुवार, 4 मार्च 2010

प्राईवेट मोटर

प्राईवेट मोटर में
म्हारा सासरा का
दो रूप्याई लागे ।
पण
सरकारी गाड़ी को कण्डक्टर
आठ रूप्या मांगे ।।

मूं बोल्यो
थू पैसा पूरा लेवे
अन
टिकट आदोई न देवे ।
वो बोल्यो
अरे भोळा जीव
इनै तो रोड़वेज की नौकरी केवे ।।

मूं बोल्यो
सरकारी गाड़्या में
अतरो भाव बढ़ग्यो ।
ओर
म्हारा ढाई रूप्या देखतांई
थारो यो मूंडो छडग्यो ।।

कण्डक्टर बोल्यो
या एक्सप्रेस हे
थारा सासरा में रूकै कोने ।
और
म्हारा से झगड़ो करर्यो
ले
रोज रूकती वेवे
तोई आज रूके कोने ।।

जेसेइ्र्र
म्हारो सासरो आयो
मे तो
मोटर का उपर सै कूदग्यो ।
पाछे को पाछे
कण्डक्टर कूद्यो
पण
वांको पग टूटग्यो ।।

हाथ जोड़ के केवे
किराया रेवादे
म्हारो पग ठीक करादे ।
मूं बोल्यो
थू कई म्हारा केबाउं कूद्यो
या बाता बतादे ।।

अगर पग
थारी जगा म्हारो टूट जातो
कई थू ठीक करातो ।
ठीक कराबो तो घणो छेटी स्याणा
थू
मोटर भी नी ढाबतो ।।

भागजा टूटी टांग्ड़ी लेर
भाग सके जतरो तेज
भागजा थारी जान बचाके ।
यो तो वो गांव हे
जटे
दूजा का हारा में फदक-फदक करे नी
वीनेत्हरा

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