बुधवार, 3 मार्च 2010

बहुत कुछ


आज तक
आज नहीं तो कल
सबको मिलता रहा
उसकी
जरूरत मुताबिक
कुछ ना कुछ
आप ही बताइये जनाब
जहान में आज तक
किसको नसीब हुआ
सब कुछ ।।

फिर भी
लाखों लोग
लाखों बार
जाने क्यों
बेवजह
रोते-रोते चले गए
कुछ तो
आज भी रो रहे
कुछ
बेशक
कल तक रोने ही वाले

देखो
देखो
तीनों किस्मों के
चाहो जितने नजारे
और
समझना
चाहो तो समझलो
मेरी
इस छोटी सी नज्म को
बहुत बारीकी से

जाने कैसे
इसी में छिपा
दुनिया का बहुत कुछ ।।

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