रविवार, 14 फ़रवरी 2010

तार

आज कल
किसी से कोई काम करवाना हो
कई दिनों तक वह केवल आप की बात सुनता है
कई महीनो तक केवल विचार करता है
फिर
कुछ मिनटों का काम
कुछ महीनों में निपटा देता है

यही कार्य प्रणाली
कई ऑफिसरों
कर्मचरियों के घट- घट में
ईश्वर की तरह विद्यमान

मसलन
आपने किसी को मृत्यु का तार दिया
वह बाहरवे दिन तो मिल ही जाता
बाइ चान्स लेट हो गया
मृतक की
छह मासी या बारह मासी तक तो मिल ही जायेगा

कुछ समझदार दर एवम दूरदर्शी व्यक्ति तो
सीरियस होते ही आपने परिजनों को अपने आत्मीय जनों को
सभी ईष्ट मित्रो को तार दे देते हैं

इससे बहुत बड़ा फायदा यह होता हे की
तार धोनी की तरह ही कितने ही रन बनाए
फिर भी बिफोर टाइम पहुँच जाता है
अर्थात् बहुत सीरियस का तार कभी कभी मृत्यु से पहले मिल जाता है

और आत्म जन पीटी ऊषा की तरह दोडे चले आते है
और अंतिम संस्कार में सम्मलित हो जाते है
वे चन्दन की लकड़ी तो देते हे
किन्तु कर्ण केश फिर भी रह जाते
क्यूँ की तब तक नई चला गया होता
नई को फिर अर्जेंट तार दिया जाता है
देर से आने वाले सभी लेट कमर्स के
कर्ण केश लेलो भाई
यह तार तो ग्यारवे दिन ही मिल जाता
क्यूँ की
लोकल तार हैं |

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