शुक्रवार, 12 फ़रवरी 2010

चाँद

बार-बार देखें सभी , इतना प्यारा रूप
कोई कहता चांदनी , कोई कहता धूप ।।
कोई कहता धूप , करे सब नो-नो बातें
एक उपाय विवाह , चांदनी सी सब रातें ।।
कहवाणीकविराज, दिल की सुनो पुकार
अपना है जब चाँद ,देय दर्शन बार-बार ।।


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