सोमवार, 18 जनवरी 2010

पैसा

पैसा ऐसी धार है , बनती आंसू धार |
धार उधारी झेलते , डूब गए मंझधार ||
डूब गए मंझधार , गाते सब अपने गीत |
प्यारी प्यारी राग , सुने नहीं कोई मीत ||
कह 'वाणी' कविराज , हाल बिगड़ा है ऐसा |
पैसा मांगे लोग , हम मांगे पैसा - पैसा ||


2 टिप्‍पणियां:

amritwani.com ने कहा…

ये आम आदमी की आत्मा की आवाज हे |

बेनामी ने कहा…

तू पैसा पैसा करती हे तू पैसे पर क्यूँ मरती हे |

राहुल शर्मा